रक्तिम क्षितिज के उस पार
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Sinopsis
मानव सभ्यता के इतिहास में युद्ध सदैव केवल सीमाओं के विस्तार अथवा संकुचन की घटनाएँ नहीं रहे हैं। वे उन असंख्य मानवीय संवेदनाओं के विध्वंस की कथाएँ भी रहे हैं, जिनकी नींव पर समाज और संस्कृति का निर्माण होता है। जब दो राष्ट्र अपनी सीमाओं, महत्वाकांक्षाओं, अस्मिता और अहंकार की रक्षा के नाम पर युद्ध के मार्ग पर अग्रसर होते हैं, तब रणभूमि में केवल सैनिक ही नहीं उतरते; उनके साथ उतरती हैं लाखों उम्मीदें, असंख्य सपने और अनगिनत रिश्ते। युद्ध का पहला शिकार सत्य होता है और अंतिम शिकार मानवता।
"रक्तिम क्षितिज के उस पार" ऐसी ही एक मार्मिक, व्यापक और आत्ममंथन कराती हुई कहानी है, जो युद्ध की विभीषिका के बीच मनुष्य की संवेदनाओं, प्रेम, त्याग, पीड़ा और संघर्ष की कहानी कहती है। यह केवल दो देशों के बीच लड़े गए युद्ध का वर्णन नहीं है, बल्कि उन करोड़ों साधारण लोगों की कथा है, जिनका युद्ध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता, फिर भी वे उसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं।
यह कहानी हमें उस संसार में ले जाती है जहाँ सीमाओं पर बारूद की गंध फैली हुई है, आकाश में लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई देती है और धरती पर तोपों की आग बरस रही है। किन्तु इसी भयावह वातावरण के बीच कहीं प्रेम के नाजुक फूल भी खिल रहे हैं। कुछ लोग सपने देख रहे हैं, कुछ भविष्य की योजनाएँ बना रहे हैं, कुछ अपने प्रियजनों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्हें यह विश्वास है कि युद्ध शीघ्र समाप्त हो जाएगा और जीवन पुनः अपनी सामान्य गति प्राप्त कर लेगा। परन्तु युद्ध कभी केवल मोर्चों पर नहीं लड़ा जाता; वह मनुष्यों के हृदयों में भी लड़ा जाता है और उसकी सबसे गहरी चोट वहीं पड़ती है।
"रक्तिम क्षितिज के उस पार" केवल युद्ध का वृत्ता...
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Ficha Técnica
Editorial: Naval Kishor Soni
ISBN: 9798233967009
Fecha de lanzamiento: 16/07/2026
Especificaciones del producto
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